नामकरण संस्कार मुहूर्त 2020 – सितंबर से दिसंबर माह का शुभ मुहूर्त

नमस्कार मित्रों मेरा नाम शैलेश तिवारी है। और मैं आज आपको सितंबर माह से लेकर दिसंबर माह तक के सभी नामकरण संस्कार मुहूर्त 2020 (Namkaran muhurat 2020) के बारे में बताऊंगा। इसमें मैं नामकरण के महत्व, गंडमूल दोष या नक्षत्र किसे कहते हैं?, नामकरण के लिए मुहूर्त क्यों आवश्यक है? के बारे में भी विस्तार से बात करने वाले हैं

माहदिनांक
सितंबर 202002, 03, 04, 06, 09, 10, 13, 14
अक्टूबर 202019, 22, 23, 26, 28, 29, 30
नवंबर 20202, 11, 12, 13, 15, 16, 19, 20, 22, 25, 26, 27, 30
दिसंबर 202002, 06, 12, 27, 30

नामकरण के महत्व

Namkaran muhurat 2020 (नामकरण संस्कार मुहूर्त 2020) – हिंदू धर्म में 16 संस्कार होते हैं। जिनमें से नामकरण भी एक संस्कार है।

नामकरण संस्कार में बच्चों के जन्म के बाद उनका नाम रखा जाता है।

इस संस्कार को करने के लिए बच्चे के जन्म के समय से लेकर जब बच्चा 11 दिन का हो जाता है। तब उसका नामकरण किया जाता है।

नामकरण संस्कार को हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण संस्कार के रूप में माना जाता है।

क्योंकि इसमें बच्चे का नाम रखा जाता है, जोकि शास्त्र और पुराण के अनुसार शुभ समय में किया जाता है।

लेकिन अगर बच्चे का जन्म गण्डमूल नक्षत्र में होता है। तब उस बच्चे का नामकरण उसके जन्म के समय से लेकर 27 दिन के बाद किया जाता है।

क्योंकि नामकरण करने से पहले गण्डमूल नक्षत्र को शांति किया जाता है।

इसलिए अगर आप जब भी अपने बच्चे का नामकरण करें तो किसी ज्योतिषी या पंडित के सलाह से ही करें।

क्योंकि शुभ कार्य को शुभ समय पर करने से ही उसके शुभ परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।

गंडमूल दोष या नक्षत्र किसे कहते हैं?

नामकरण मुहूर्त 2020 – अगर बात करते हैं गंड मूल दोष के बारे में तो इसे वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुछ नक्षत्र को गंड मूल नक्षत्र की श्रेणी में रखा गया है।

क्योंकि गंड मूल नक्षत्र को काफी संवेदनशील माना जाता है। यह नक्षत्र चक्र और राशि चक्र इन दोनों क्षेत्र मैं गंड मूल नक्षत्र पर संधि होता है।

और इस नक्षत्र को केतु और बुध के नक्षत्र कहते हैं। और जब केतु का नक्षत्र समाप्त हो जाता है तब बुध का नक्षत्र प्रारंभ होता है। इसी स्थिति को गंड मूल नक्षत्र भी कहा जाता है।

नामकरण के लिए मुहूर्त क्यों आवश्यक है?

अगर नामकरण संस्कार के बारे में बात करें तो नामकरण संस्कार किसी भी दिन किया जा सकता है। लेकिन इसको शुभ समय में करना ही बेहतर होता है।

क्योंकि कुछ ऐसी तिथियां होती हैं जिसमें नामकरण का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। यह तिथियां है चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी

तो वहीं शुभ नक्षत्र की बात करें तो इसमें मृगशिरा, रोहिणी, श्रवण, अश्विनी, अनुराधा, शतभिषा, चित्रा, स्वाति, पुष्य, रेवती, हस्त आदि नक्षत्र है।

लेकिन अगर शिशु का जन्म किसी अशुभ नक्षत्र में भी हो जाता है। तो वह नक्षत्र शिशु के नामकरण के लिए शुभ माना जाता है।

इसलिए आप जब भी शिशु का नामकरण करें तो उसमें आप कुंडली, वार, तिथि और नक्षत्र पर खास विचार करें।

और उसके साथ ही शिशु के जन्म का माह और राशि पर भी विचार करें।

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